पर्यावरण और सतत विकास में भारतीय ज्ञान

Authors

  • जयेश कुमार पाटीदार

Subjects/Theme:

पर्यावरण, सतत विकास, पंचतत्व, भारतीय ज्ञान प्रणाली, प्रकृति संतुलन, सतत जीवनशैली

Description

भारतीय ज्ञान प्रणाली: परंपरा, विज्ञान और समकालीन प्रासंगिकता,

संपादक: मोहन सिहाग, जॉयदेब पात्रा

ISBN (978-81-685212-7-8)

भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण और सतत विकास का विचार अत्यंत प्राचीन, वैज्ञानिक और समग्र दृष्टिकोण पर आधारित रहा है। यह केवल प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मानव के बीच संतुलित संबंध स्थापित करने पर बल देता है। भारतीय दृष्टिकोण में प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि एक जीवंत और पूजनीय तत्व माना गया है, जिसके साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीना आवश्यक है। इस अध्याय में भारतीय ज्ञान प्रणाली के पर्यावरणीय दृष्टिकोण का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें प्रकृति के साथ संतुलन, पंचतत्व सिद्धांत और सतत जीवनशैली जैसे प्रमुख आयामों का विश्लेषण किया गया है। यह दर्शाया गया है कि भारतीय परंपराएँ—जैसे वृक्ष पूजा, जल संरक्षण, और जैव विविधता के प्रति सम्मान—सतत विकास के आधुनिक सिद्धांतों से गहराई से जुड़ी हुई हैं। अध्याय में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली का समग्र दृष्टिकोण आधुनिक पर्यावरणीय चुनौतियों—जैसे जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और संसाधनों के अति-उपयोग—का प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सकता है।

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Published

2024-01-30

How to Cite

जयेश कुमार पाटीदार. (2024). पर्यावरण और सतत विकास में भारतीय ज्ञान. International Multidisciplinary Book Series, 2. Retrieved from https://www.ibseries.com/index.php/IMBS/article/view/36

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