भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं भू-स्थानिक तकनीकों का समन्वय: राजस्थान के अर्ध-शुष्क परिदृश्य का भू-स्थानिक विश्लेषण

Authors

  • डॉ. देवेश सहारण
  • डॉ. श्वेता नेहरा

Subjects/Theme:

बीकानेर, भारतीय ज्ञान प्रणाली, भू-स्थानिक तकनीक, खडीन, टांका, मरुस्थलीकरण, सतत विकास

Description

भारतीय ज्ञान प्रणाली: परंपरा, विज्ञान और समकालीन प्रासंगिकता,

संपादक: मोहन सिहाग, जॉयदेब पात्रा

ISBN (978-81-685212-7-8)

भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System – IKS) और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों (GIS, Remote Sensing, GPS) का समन्वय बीकानेर जैसे अर्ध-शुष्क एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों में सतत विकास के लिए एक प्रभावी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। बीकानेर क्षेत्र जल संकट, भूजल लवणता, मरुस्थलीकरण और सीमित कृषि उत्पादकता जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से प्रभावित है। इस अध्याय में क्षेत्र की पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों—जैसे टांका, खडीन और नाड़ी—का आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों के साथ समन्वित विश्लेषण किया गया है। GIS आधारित भूमि उपयोग (LULC), NDVI तथा जल संसाधन मानचित्रण के माध्यम से इन पारंपरिक संरचनाओं की प्रभावशीलता का आकलन किया गया है। अध्ययन यह दर्शाता है कि स्थानीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय जल संसाधन प्रबंधन, भूमि उपयोग नियोजन और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जो सतत विकास के लिए एक व्यवहारिक और वैज्ञानिक मॉडल प्रस्तुत करता है।

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Published

2024-02-28

How to Cite

डॉ. देवेश सहारण, & डॉ. श्वेता नेहरा. (2024). भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं भू-स्थानिक तकनीकों का समन्वय: राजस्थान के अर्ध-शुष्क परिदृश्य का भू-स्थानिक विश्लेषण. International Multidisciplinary Book Series, 2(1). Retrieved from https://www.ibseries.com/index.php/IMBS/article/view/58

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